श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.15.16

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

तस्माद्युवां ग्राम्यपशोर्मम मूढधियः प्रभू।

अन्धे तमसि मग्नस्य ज्ञानदीप उदीर्यताम्॥ १६

tasmādyuvāṃ grāmyapaśormama mūḍhadhiyaḥ prabhū|

andhe tamasi magnasya jñānadīpa udīryatām|| 16

अर्थ

स्वामियो! मैं विषयभोगोंमें फँसा हुआ, मूढ़बुद्धि ग्राम्य पशु हूँ और अज्ञानके घोर अन्धकारमें डूब रहा हूँ। आपलोग मुझे ज्ञानकी ज्योतिसे प्रकाशके केन्द्रमें लाइये॥ १६॥

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