श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.9

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

शृणुष्वावहितो राजन्‍नितिहासमिमं यथा।

श्रुतं द्वैपायनमुखान्‍नारदाद्देवलादपि॥ ९

śṛṇuṣvāvahito rājannitihāsamimaṃ yathā|

śrutaṃ dvaipāyanamukhānnāradāddevalādapi|| 9

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! तुम सावधान होकर यह इतिहास सुनो। मैंने इसे अपने पिता व्यासजी, देवर्षि नारद और महर्षि देवलके मुँहसे भी विधिपूर्वक सुना है॥ ९॥

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