॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.14.57
उत्तिष्ठ तात त इमे शिशवो वयस्या-
स्त्वामाह्वयन्ति नृपनन्दन संविहर्तुम्।
सुप्तश्चिरं ह्यशनया च भवान् परीतो
भुङ्क्ष्व स्तनं पिब शुचो हर नः स्वकानाम्॥ ५७
uttiṣṭha tāta ta ime śiśavo vayasyā-
stvāmāhvayanti nṛpanandana saṃvihartum|
suptaściraṃ hyaśanayā ca bhavān parīto
bhuṅkṣva stanaṃ piba śuco hara naḥ svakānām|| 57
अर्थ
मेरे प्यारे लल्ला! ओ राजकुमार! उठो! बेटा! देखो, तुम्हारे साथी बालक तुम्हें खेलनेके लिये बुला रहे हैं। तुम्हें सोते-सोते बहुत देर हो गयी, अब भूख लगी होगी। उठो, कुछ खा लो। और कुछ नहीं तो मेरा दूध ही पी लो और अपने स्वजन-सम्बन्धी हमलोगोंका शोक दूर करो॥ ५७॥