श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.33

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

हृष्टो राजा कुमारस्य स्नातः शुचिरलङ्कृतः।

वाचयित्वाऽऽशिषो विप्रैः कारयामास जातकम्॥ ३३

hṛṣṭo rājā kumārasya snātaḥ śuciralaṅkṛtaḥ|

vācayitvā''śiṣo vipraiḥ kārayāmāsa jātakam|| 33

अर्थ

सम्राट् चित्रकेतुके आनन्दका तो कहना ही क्या था। वे स्नान करके पवित्र हुए। फिर उन्होंने वस्त्राभूषणोंसे सुसज्जित हो, ब्राह्मणोंसे स्वस्तिवाचन कराकर और आशीर्वाद लेकर पुत्रका जातकर्म-संस्कार करवाया॥ ३३॥

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