उस यज्ञावशेष प्रसादके खानेसे ही महारानी कृतद्युतिने महाराज चित्रकेतुके द्वारा गर्भ धारण किया, जैसे कृत्तिकाने अपने गर्भमें अग्निकुमारको धारण किया था॥ ३०॥
सापि तत्प्राशनादेव चित्रकेतोरधारयत्।
गर्भं कृतद्युतिर्देवी कृत्तिकाग्नेरिवात्मजम्॥ ३०
उस यज्ञावशेष प्रसादके खानेसे ही महारानी कृतद्युतिने महाराज चित्रकेतुके द्वारा गर्भ धारण किया, जैसे कृत्तिकाने अपने गर्भमें अग्निकुमारको धारण किया था॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 771) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/30/