श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.20

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यस्यात्मानुवशश्चेत्स्यात्सर्वे तद्वशगा इमे।

लोकाः सपाला यच्छन्ति सर्वे बलिमतन्द्रिताः॥ २०

yasyātmānuvaśaścetsyātsarve tadvaśagā ime|

lokāḥ sapālā yacchanti sarve balimatandritāḥ|| 20

अर्थ

सच्ची बात तो यह है कि जिसका मन अपने वशमें है, उसके ये सभी वशमें होते हैं। इतना ही नहीं, सभी लोक और लोकपाल भी बड़ी सावधानीसे उसे भेंट देकर उसकी प्रसन्‍नता चाहते हैं॥ २०॥

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