श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.14

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तस्यैकदा तु भवनमङ्गिरा भगवानृषिः।

लोकाननुचरन्‍नेतानुपागच्छद्यदृच्छया ॥ १४

tasyaikadā tu bhavanamaṅgirā bhagavānṛṣiḥ|

lokānanucarannetānupāgacchadyadṛcchayā || 14

अर्थ

एक दिन शाप और वरदान देनेमें समर्थ अंगिरा ऋषि स्वच्छन्दरूपसे विभिन्‍न लोकोंमें विचरते हुए राजा चित्रकेतुके महलमें पहुँच गये॥ १४॥

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