अवश्य ही तुम लोगोंको मोहित करनेवाली भगवान्की मायाको पार कर गये हो। तभी तो तुम असुरोचित भाव छोड़कर महापुरुष हो गये हो॥ २०॥✎ 532
भवानतार्षीन्मायां वै वैष्णवीं जनमोहिनीम्।
यद् विहायासुरं भावं महापुरुषतां गतः॥ २०
अवश्य ही तुम लोगोंको मोहित करनेवाली भगवान्की मायाको पार कर गये हो। तभी तो तुम असुरोचित भाव छोड़कर महापुरुष हो गये हो॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.12.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 763) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/12/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)