॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.10.20
पुलोमा वृषपर्वा च प्रहेतिर्हेतिरुत्कलः।
दैतेया दानवा यक्षा रक्षांसि च सहस्रशः॥ २०
pulomā vṛṣaparvā ca prahetirhetirutkalaḥ|
daiteyā dānavā yakṣā rakṣāṃsi ca sahasraśaḥ|| 20
अर्थ
तब नमुचि, शम्बर, अनर्वा, द्विमूर्धा, ऋषभ, अम्बर, हयग्रीव, शंकुशिरा, विप्रचित्ति, अयोमुख, पुलोमा, वृषपर्वा, प्रहेति, हेति, उत्कल, सुमाली, माली आदि हजारों दैत्य-दानव एवं यक्ष-राक्षस स्वर्णके साज-सामानसे सुसज्जित होकर देवराज इन्द्रकी सेनाको आगे बढ़नेसे रोकने लगे। परीक्षित्! उस समय देवताओंकी सेना स्वयं मृत्युके लिये भी अजेय थी॥ १९—२१॥