वर्तमान समय ही भूत और भविष्यका अनुमान करा देता है। वैसे ही वर्तमान जन्मके पाप-पुण्य भी भूत और भविष्य-जन्मोंके पाप-पुण्यका अनुमान करा देते हैं॥ ४७॥
वर्तमानोऽन्ययोः कालो गुणाभिज्ञापको यथा।
एवं जन्मान्ययोरेतद्धर्माधर्मनिदर्शनम्॥ ४७
वर्तमान समय ही भूत और भविष्यका अनुमान करा देता है। वैसे ही वर्तमान जन्मके पाप-पुण्य भी भूत और भविष्य-जन्मोंके पाप-पुण्यका अनुमान करा देते हैं॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 700) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/47/