श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.39

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

कथंस्विद् ध्रियते दण्डः किं वास्य स्थानमीप्सितम्।

दण्ड्याः किं कारिणः सर्वे आहोस्वित्कतिचिन्‍नृणाम्॥ ३९

kathaṃsvid dhriyate daṇḍaḥ kiṃ vāsya sthānamīpsitam|

daṇḍyāḥ kiṃ kāriṇaḥ sarve āhosvitkaticinnṛṇām|| 39

अर्थ

दण्ड किस प्रकार दिया जाता है? दण्डका पात्र कौन है? मनुष्योंमें सभी पापाचारी दण्डनीय हैं अथवा उनमेंसे कुछ ही?॥ ३९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें