श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.33

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

कस्य वा कुत आयाताः कस्मादस्य निषेधथ।

किं देवा उपदेवा वा यूयं किं सिद्धसत्तमाः॥ ३३

kasya vā kuta āyātāḥ kasmādasya niṣedhatha|

kiṃ devā upadevā vā yūyaṃ kiṃ siddhasattamāḥ|| 33

अर्थ

तुम किसके दूत हो, कहाँसे आये हो और इसे ले जानेसे हमें क्यों रोक रहे हो? क्या तुमलोग कोई देवता, उपदेवता अथवा सिद्धश्रेष्ठ हो?॥ ३३॥

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