भगवान्के पार्षदोंने देखा कि यह मरते समय हमारे स्वामी भगवान् नारायणका नाम ले रहा है, उनके नामका कीर्तन कर रहा है; अतः वे बड़े वेगसे झटपट वहाँ आ पहुँचे॥ ३०॥
निशम्य म्रियमाणस्य ब्रुवतो हरिकीर्तनम्।
भर्तुर्नाम महाराज पार्षदाः सहसाऽपतन्॥ ३०
भगवान्के पार्षदोंने देखा कि यह मरते समय हमारे स्वामी भगवान् नारायणका नाम ले रहा है, उनके नामका कीर्तन कर रहा है; अतः वे बड़े वेगसे झटपट वहाँ आ पहुँचे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 698) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/30/