श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.30

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

निशम्य म्रियमाणस्य ब्रुवतो हरिकीर्तनम्।

भर्तुर्नाम महाराज पार्षदाः सहसाऽपतन्॥ ३०

niśamya mriyamāṇasya bruvato harikīrtanam|

bharturnāma mahārāja pārṣadāḥ sahasā'patan|| 30

अर्थ

भगवान्‌के पार्षदोंने देखा कि यह मरते समय हमारे स्वामी भगवान् नारायणका नाम ले रहा है, उनके नामका कीर्तन कर रहा है; अतः वे बड़े वेगसे झटपट वहाँ आ पहुँचे॥ ३०॥

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