श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.28

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स पाशहस्तांस्त्रीन्दृष्ट्वा पुरुषान् भृशदारुणान्।

वक्रतुण्डानूर्ध्वरोम्ण आत्मानं नेतुमागतान्॥ २८

sa pāśahastāṃstrīndṛṣṭvā puruṣān bhṛśadāruṇān|

vakratuṇḍānūrdhvaromṇa ātmānaṃ netumāgatān|| 28

अर्थ

इतनेमें ही अजामिलने देखा कि उसे ले जानेके लिये अत्यन्त भयावने तीन यमदूत आये हैं। उनके हाथोंमें फाँसी है, मुँह टेढ़े-टेढ़े हैं और शरीरके रोएँ खड़े हुए हैं॥ २८॥

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