tatprasavotsarpaṇabhayakhedāturā svagaṇena viyujyamānā kasyāñciddaryāṃ kṛṣṇasārasatī nipapātātha ca mamāra|| 6||
अर्थ
वह कृष्णमृगपत्नी अकस्मात् गर्भके गिर जाने, लम्बी छलाँग मारने तथा सिंहसे डरी होनेके कारण बहुत पीड़ित हो गयी थी। अब अपने झुंडसे भी उसका बिछोह हो गया, इसलिये वह किसी गुफामें जा पड़ी और वहीं मर गयी॥ ६॥
तत्प्रसवोत्सर्पणभयखेदातुरा स्वगणेन वियुज्यमाना कस्याञ्चिद्दर्यां कृष्णसारसती निपपाताथ च ममार॥ ६॥
वह कृष्णमृगपत्नी अकस्मात् गर्भके गिर जाने, लम्बी छलाँग मारने तथा सिंहसे डरी होनेके कारण बहुत पीड़ित हो गयी थी। अब अपने झुंडसे भी उसका बिछोह हो गया, इसलिये वह किसी गुफामें जा पड़ी और वहीं मर गयी॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.8.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 606) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/8/6/