राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! आप जिनका वर्णन करना चाहते हैं, वे नरक इसी पृथ्वीके कोई देशविशेष हैं अथवा त्रिलोकीसे बाहर या इसीके भीतर किसी जगह हैं?॥ ४॥
नरका नाम भगवन् किं देशविशेषा अथवा बहिस्त्रिलोक्या आहोस्विदन्तराल इति॥ ४॥
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! आप जिनका वर्णन करना चाहते हैं, वे नरक इसी पृथ्वीके कोई देशविशेष हैं अथवा त्रिलोकीसे बाहर या इसीके भीतर किसी जगह हैं?॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.26.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 686) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/26/4/