श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.26.39

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

श्रुत्वा स्थूलं तथा सूक्ष्मं रूपं भगवतो यतिः।

स्थूले निर्जितमात्मानं शनैः सूक्ष्मं धिया नयेदिति॥ ३९

śrutvā sthūlaṃ tathā sūkṣmaṃ rūpaṃ bhagavato yatiḥ|

sthūle nirjitamātmānaṃ śanaiḥ sūkṣmaṃ dhiyā nayediti|| 39

अर्थ

यतिको चाहिये कि भगवान्‌के स्थूल और सूक्ष्म दोनों प्रकारके रूपोंका श्रवण करके पहले स्थूलरूपमें चित्तको स्थिर करे, फिर धीरे-धीरे वहाँसे हटाकर उसे सूक्ष्ममें लगा दे॥ ३९॥

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