श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.24.28

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

ततोऽधस्तात्तलातले मयो नाम दानवेन्द्रस्त्रिपुराधिपतिर्भगवता पुरारिणा५ त्रिलोकीशं चिकीर्षुणा निर्दग्धस्वपुरत्रयस्तत्प्रसादाल्लब्धपदो मायाविनामाचार्यो६ महादेवेन परिरक्षितो विगतसुदर्शनभयो महीयते॥ २८॥

tato'dhastāttalātale mayo nāma dānavendrastripurādhipatirbhagavatā purāriṇā trilokīśaṃ cikīrṣuṇā nirdagdhasvapuratrayastatprasādāllabdhapado māyāvināmācāryo mahādevena parirakṣito vigatasudarśanabhayo mahīyate|| 28||

अर्थ

सुतललोकसे नीचे तलातल है। वहाँ त्रिपुराधिपति दानवराज मय रहता है। पहले तीनों लोकोंको शान्ति प्रदान करनेके लिये भगवान् शंकरने उसके तीनों पुर भस्म कर दिये थे। फिर उन्हींकी कृपासे उसे यह स्थान मिला। वह मायावियोंका परम गुरु है और महादेवजीके द्वारा सुरक्षित है, इसलिये उसे सुदर्शन चक्रसे भी कोई भय नहीं है। वहाँके निवासी उसका बहुत आदर करते हैं॥ २८॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    प्रा० पा०—त्रिपुरारिणा त्रिलोक्यर्थं।

    (मुद्रित पृष्ठ 681)
  2. ६

    प्रा० पा०—मायानामाचार्यो।

    (मुद्रित पृष्ठ 681)

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