श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.20.46

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

देवतिर्यङ्मनुष्याणां सरीसृपसवीरुधाम्।

सर्वजीवनिकायानां सूर्य आत्मा दृगीश्‍वरः॥ ४६

devatiryaṅmanuṣyāṇāṃ sarīsṛpasavīrudhām|

sarvajīvanikāyānāṃ sūrya ātmā dṛgīśvaraḥ|| 46

अर्थ

सूर्य ही देवता, तिर्यक्, मनुष्य, सरीसृप और लता-वृक्षादि समस्त जीवसमूहोंके आत्मा और नेत्रेन्द्रियके अधिष्ठाता हैं॥ ४६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां पञ्चमस्कन्धे भुवनकोशवर्णने
समुद्रवर्षसंनिवेशपरिमाणलक्षणो विंशोऽध्यायः
॥ २०॥

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