श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.20.12

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

स्वगोभिः पितृदेवेभ्यो विभजन् कृष्णशुक्लयोः।

प्रजानां सर्वासां राजान्धः सोमो न आस्त्विति॥ १२

svagobhiḥ pitṛdevebhyo vibhajan kṛṣṇaśuklayoḥ|

prajānāṃ sarvāsāṃ rājāndhaḥ somo na āstviti|| 12

अर्थ

(और कहते हैं—) ‘जो कृष्णपक्ष और शुक्लपक्षमें अपनी किरणोंसे विभाग करके देवता, पितर और सम्पूर्ण प्राणियोंको अन्‍न देते हैं, वे चन्द्रदेव हमारे राजा (रंजन करनेवाले) हों’॥ १२॥✎ 468

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #468 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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