श्रीशुकदेवजी कहते हैं—राजन्! किम्पुरुषवर्षमें श्रीलक्ष्मणजीके बड़े भाई, आदिपुरुष, सीताहृदयाभिराम भगवान् श्रीरामके चरणोंकी सन्निधिके रसिक परम भागवत श्रीहनुमान्जी अन्य किन्नरोंके सहित अविचल भक्तिभावसे उनकी उपासना करते हैं॥ १॥
किम्पुरुषे वर्षे भगवन्तमादिपुरुषं लक्ष्मणाग्रजं सीताभिरामं रामं तच्चरणसंनिकर्षाभिरतः परमभागवतो हनुमान् सह किम्पुरुषैः अविरतभक्तिरुपास्ते॥ १॥
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—राजन्! किम्पुरुषवर्षमें श्रीलक्ष्मणजीके बड़े भाई, आदिपुरुष, सीताहृदयाभिराम भगवान् श्रीरामके चरणोंकी सन्निधिके रसिक परम भागवत श्रीहनुमान्जी अन्य किन्नरोंके सहित अविचल भक्तिभावसे उनकी उपासना करते हैं॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.19.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 656) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/19/1/