॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 5.13.11
क्वचिच्च शीतातपवातवर्ष-
प्रतिक्रियां कर्तुमनीश आस्ते।
क्वचिन्मिथो विपणन् यच्च किञ्चिद्
विद्वेषमृच्छत्युत वित्तशाठ्यात्॥ ११
kvacicca śītātapavātavarṣa-
pratikriyāṃ kartumanīśa āste|
kvacinmitho vipaṇan yacca kiñcid
vidveṣamṛcchatyuta vittaśāṭhyāt|| 11
अर्थ
कभी शीत, घाम, आँधी और वर्षासे अपनी रक्षा करनेमें असमर्थ हो जाता है। कभी आपसमें थोड़ा-बहुत व्यापार करता है, तो धनके लोभसे दूसरोंको धोखा देकर उनसे वैर ठान लेता है॥ ११॥