श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.12.6

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

अंसेऽधि दार्वी शिबिका च यस्यां

सौवीरराजेत्यपदेश आस्ते।

यस्मिन् भवान् रूढनिजाभिमानो

राजास्मि सिन्धुष्विति दुर्मदान्धः॥ ६

aṃse'dhi dārvī śibikā ca yasyāṃ

sauvīrarājetyapadeśa āste|

yasmin bhavān rūḍhanijābhimāno

rājāsmi sindhuṣviti durmadāndhaḥ|| 6

अर्थ

कंधोंके ऊपर लकड़ीकी पालकी रखी हुई है; उसमें भी सौवीरराज नामका एक पार्थिव विकार ही है, जिसमें आत्मबुद्धिरूप अभिमान करनेसे तुम ‘मैं सिन्धु देशका राजा हूँ’ इस प्रबल मदसे अंधे हो रहे हो॥ ६॥

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