॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 5.12.13
यत्रोत्तमश्लोकगुणानुवादः
प्रस्तूयते ग्राम्यकथाविघातः।
निषेव्यमाणोऽनुदिनं मुमुक्षो-
र्मतिं सतीं यच्छति वासुदेवे॥ १३
yatrottamaślokaguṇānuvādaḥ
prastūyate grāmyakathāvighātaḥ|
niṣevyamāṇo'nudinaṃ mumukṣo-
rmatiṃ satīṃ yacchati vāsudeve|| 13
अर्थ
इसका कारण यह है कि महापुरुषोंके समाजमें सदा पवित्रकीर्ति श्रीहरिके गुणोंकी चर्चा होती रहती है, जिससे विषयवार्ता तो पास ही नहीं फटकने पाती और जब भगवत्कथाका नित्यप्रति सेवन किया जाता है, तब वह मोक्षाकांक्षी पुरुषकी शुद्ध बुद्धिको भगवान् वासुदेवमें लगा देती है॥ १३॥