श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.10.9

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ब्राह्मण उवाच

त्वयोदितं व्यक्तमविप्रलब्धं

भर्तुः स मे स्याद्यदि वीर भारः।

गन्तुर्यदि स्यादधिगम्यमध्वा

पीवेति राशौ न विदां प्रवादः॥ ९

tvayoditaṃ vyaktamavipralabdhaṃ

bhartuḥ sa me syādyadi vīra bhāraḥ|

ganturyadi syādadhigamyamadhvā

pīveti rāśau na vidāṃ pravādaḥ|| 9

अर्थ

जडभरतने कहा—राजन्! तुमने जो कुछ कहा वह यथार्थ है। उसमें कोई उलाहना नहीं है। यदि भार नामकी कोई वस्तु है तो ढोनेवालेके लिये है, यदि कोई मार्ग है तो वह चलनेवालेके लिये है। मोटापन भी उसीका है, यह सब शरीरके लिये कहा जाता है, आत्माके लिये नहीं। ज्ञानीजन ऐसी बात नहीं करते॥ ९॥

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