श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.10

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

या निर्वृतिस्तनुभृतां तव पादपद्म-

ध्यानाद्भवज्जनकथाश्रवणेन वा स्यात्।

सा ब्रह्मणि स्वमहिमन्यपि नाथ मा भूत्

किं त्वन्तकासिलुलितात्पततां विमानात्॥ १०

yā nirvṛtistanubhṛtāṃ tava pādapadma-

dhyānādbhavajjanakathāśravaṇena vā syāt|

sā brahmaṇi svamahimanyapi nātha mā bhūt

kiṃ tvantakāsilulitātpatatāṃ vimānāt|| 10

अर्थ

नाथ! आपके चरणकमलोंका ध्यान करनेसे और आपके भक्तोंके पवित्र चरित्र सुननेसे प्राणियोंको जो आनन्द प्राप्त होता है, वह निजानन्दस्वरूप ब्रह्ममें भी नहीं मिल सकता। फिर जिन्हें कालकी तलवार काटे डालती है उन स्वर्गीय विमानोंसे गिरनेवाले पुरुषोंको तो वह सुख मिल ही कैसे सकता है॥ १०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें