श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.48

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

किरीटिनं कुण्डलिनं केयूरवलयान्वितम्।

कौस्तुभाभरणग्रीवं पीतकौशेयवाससम्॥ ४८

kirīṭinaṃ kuṇḍalinaṃ keyūravalayānvitam|

kaustubhābharaṇagrīvaṃ pītakauśeyavāsasam|| 48

अर्थ

उनके अंग-प्रत्यंग किरीट, कुण्डल, केयूर और कंकणादि आभूषणोंसे विभूषित हैं; गला कौस्तुभमणिकी भी शोभा बढ़ा रहा है तथा शरीरमें रेशमी पीताम्बर है॥ ४८॥✎ 369

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #369 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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