श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.43

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

स्नात्वानुसवनं तस्मिन् कालिन्द्याः सलिले शिवे।

कृत्वोचितानि निवसन्‍नात्मनः कल्पितासनः॥ ४३

snātvānusavanaṃ tasmin kālindyāḥ salile śive|

kṛtvocitāni nivasannātmanaḥ kalpitāsanaḥ|| 43

अर्थ

वहाँ श्रीकालिन्दीके निर्मल जलमें तीनों समय स्नान करके नित्यकर्मसे निवृत्त हो यथाविधि आसन बिछाकर स्थिरभावसे बैठना॥ ४३॥

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