बेटा! सुरुचिने तेरी सौतेली माँ होनेपर भी बात बिलकुल ठीक कही है; अतः यदि राजकुमार उत्तमके समान राजसिंहासनपर बैठना चाहता है तो द्वेषभाव छोड़कर उसीका पालन कर। बस, श्रीअधोक्षजभगवान्के चरणकमलोंकी आराधनामें लग जा॥ १९॥
आतिष्ठ तत्तात विमत्सरस्त्व-
मुक्तं समात्रापि यदव्यलीकम्।
आराधयाधोक्षजपादपद्मं
यदीच्छसेऽध्यासनमुत्तमो यथा॥ १९
बेटा! सुरुचिने तेरी सौतेली माँ होनेपर भी बात बिलकुल ठीक कही है; अतः यदि राजकुमार उत्तमके समान राजसिंहासनपर बैठना चाहता है तो द्वेषभाव छोड़कर उसीका पालन कर। बस, श्रीअधोक्षजभगवान्के चरणकमलोंकी आराधनामें लग जा॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 445) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/19/