श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

आतिष्ठ तत्तात विमत्सरस्त्व-

मुक्तं समात्रापि यदव्यलीकम्।

आराधयाधोक्षजपादपद्मं

यदीच्छसेऽध्यासनमुत्तमो यथा॥ १९

ātiṣṭha tattāta vimatsarastva-

muktaṃ samātrāpi yadavyalīkam|

ārādhayādhokṣajapādapadmaṃ

yadīcchase'dhyāsanamuttamo yathā|| 19

अर्थ

बेटा! सुरुचिने तेरी सौतेली माँ होनेपर भी बात बिलकुल ठीक कही है; अतः यदि राजकुमार उत्तमके समान राजसिंहासनपर बैठना चाहता है तो द्वेषभाव छोड़कर उसीका पालन कर। बस, श्रीअधोक्षजभगवान्‌के चरणकमलोंकी आराधनामें लग जा॥ १९॥

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