upāsyamānaṃ sakhyā ca bhartrā guhyakarakṣasām|| 34
अर्थ
भगवान् भूतनाथका श्रीअंग बड़ा ही शान्त था। सनन्दनादि शान्त सिद्धगण और सखा—यक्ष-राक्षसोंके स्वामी कुबेर उनकी सेवा कर रहे थे॥ ३४॥
सनन्दनाद्यैर्महासिद्धैः शान्तैः संशान्तविग्रहम्।
उपास्यमानं सख्या च भर्त्रा गुह्यकरक्षसाम्॥ ३४
भगवान् भूतनाथका श्रीअंग बड़ा ही शान्त था। सनन्दनादि शान्त सिद्धगण और सखा—यक्ष-राक्षसोंके स्वामी कुबेर उनकी सेवा कर रहे थे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 431) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/6/34/