यह देखकर भूत, प्रेत और पिशाचादि तो उनके इस कर्मकी प्रशंसा करते हुए ‘वाह-वाह’ करने लगे और दक्षके दलवालोंमें हाहाकार मच गया॥ २५॥
साधुवादस्तदा तेषां कर्म तत्तस्य शंसताम्।
भूतप्रेतपिशाचानामन्येषां तद्विपर्ययः॥ २५
यह देखकर भूत, प्रेत और पिशाचादि तो उनके इस कर्मकी प्रशंसा करते हुए ‘वाह-वाह’ करने लगे और दक्षके दलवालोंमें हाहाकार मच गया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.5.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 427) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/5/25/