फिर वे दक्षकी छातीपर बैठकर एक तेज तलवारसे उसका सिर काटने लगे, परन्तु बहुत प्रयत्न करनेपर भी वे उस समय उसे धड़से अलग न कर सके॥ २२॥
आक्रम्योरसि दक्षस्य शितधारेण हेतिना।
छिन्दन्नपि तदुद्धर्तुं नाशक्नोत् त्र्यम्बकस्तदा॥ २२
फिर वे दक्षकी छातीपर बैठकर एक तेज तलवारसे उसका सिर काटने लगे, परन्तु बहुत प्रयत्न करनेपर भी वे उस समय उसे धड़से अलग न कर सके॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.5.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 427) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/5/22/