आपकी ही नाभिसे ब्रह्माण्डरूप कमल प्रकट हुआ था, आपके कण्ठमें कमलकुसुमोंकी माला सुशोभित है तथा आपके चरण कमलके समान कोमल हैं; कमलनयन! आपको नमस्कार है॥ २५॥
नमः कमलनाभाय नमः कमलमालिने।
नमः कमलपादाय नमस्ते कमलेक्षण॥ २५
आपकी ही नाभिसे ब्रह्माण्डरूप कमल प्रकट हुआ था, आपके कण्ठमें कमलकुसुमोंकी माला सुशोभित है तथा आपके चरण कमलके समान कोमल हैं; कमलनयन! आपको नमस्कार है॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 567) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/25/