यदि तुम मेरी बात न मानकर वहाँ जाओगी, तो तुम्हारे लिये अच्छा न होगा; क्योंकि जब किसी प्रतिष्ठित व्यक्तिका अपने आत्मीयजनोंके द्वारा अपमान होता है, तब वह तत्काल उनकी मृत्युका कारण हो जाता है॥ २५॥
यदि व्रजिष्यस्यतिहाय मद्वचो
भद्रं भवत्या न ततो भविष्यति।
सम्भावितस्य स्वजनात्पराभवो
यदा स सद्यो मरणाय कल्पते॥ २५
यदि तुम मेरी बात न मानकर वहाँ जाओगी, तो तुम्हारे लिये अच्छा न होगा; क्योंकि जब किसी प्रतिष्ठित व्यक्तिका अपने आत्मीयजनोंके द्वारा अपमान होता है, तब वह तत्काल उनकी मृत्युका कारण हो जाता है॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 418) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/3/25/