श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.29.79

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

अतस्तदपवादार्थं१ भज सर्वात्मना हरिम्।

पश्यंस्तदात्मकं विश्‍वं स्थित्युत्पत्त्यप्यया यतः॥ ७९

atastadapavādārthaṃ bhaja sarvātmanā harim|

paśyaṃstadātmakaṃ viśvaṃ sthityutpattyapyayā yataḥ|| 79

अर्थ

अतएव उस कर्मबन्धनसे छुटकारा पानेके लिये सम्पूर्ण विश्‍वको भगवद्रूप देखते हुए सब प्रकार श्रीहरिका भजन करो। उन्हींसे इस विश्‍वकी उत्पत्ति और स्थिति होती है तथा उन्हींमें लय होता है॥ ७९॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—तदपबाधार्थं।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 563)

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