श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.64

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

एवं स मानसो हंसो हंसेन प्रतिबोधितः।

स्वस्थस्तद‍्व्यभिचारेण नष्टामाप पुनः स्मृतिम्॥ ६४

evaṃ sa mānaso haṃso haṃsena pratibodhitaḥ|

svasthastadvyabhicāreṇa naṣṭāmāpa punaḥ smṛtim|| 64

अर्थ

इस प्रकार जब हंस (ईश्‍वर)-ने उसे सावधान किया, तब वह मानसरोवरका हंस (जीव) अपने स्वरूपमें स्थित हो गया और उसे अपने मित्रके विछोहसे भूला हुआ आत्मज्ञान फिर प्राप्त हो गया॥ ६४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें