श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.38

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

तपसा विद्यया पक्‍वकषायो नियमैर्यमैः।

युयुजे ब्रह्मण्यात्मानं विजिताक्षानिलाशयः॥ ३८

tapasā vidyayā pakvakaṣāyo niyamairyamaiḥ|

yuyuje brahmaṇyātmānaṃ vijitākṣānilāśayaḥ|| 38

अर्थ

तप और उपासनासे वासनाओंको निर्मूल कर तथा यम-नियमादिके द्वारा इन्द्रिय, प्राण और मनको वशमें करके वे आत्मामें ब्रह्मभावना करने लगे॥ ३८॥

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