एक बार उन्होंने बड़े वेगसे बूढ़े साँपसे सुरक्षित और संसारकी सब प्रकारकी सुख-सामग्रीसे सम्पन्न पुरंजनपुरीको घेर लिया॥ २॥
त एकदा तु रभसा पुरंजनपुरीं नृप।
रुरुधुर्भौमभोगाढ्यां जरत्पन्नगपालिताम्॥ २
एक बार उन्होंने बड़े वेगसे बूढ़े साँपसे सुरक्षित और संसारकी सब प्रकारकी सुख-सामग्रीसे सम्पन्न पुरंजनपुरीको घेर लिया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 546) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/2/