श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.30

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

प्रज्वारोऽयं मम भ्राता त्वं च मे भगिनी भव।

चराम्युभाभ्यां लोकेऽस्मिन्‍नव्यक्तो भीमसैनिकः॥ ३०

prajvāro'yaṃ mama bhrātā tvaṃ ca me bhaginī bhava|

carāmyubhābhyāṃ loke'sminnavyakto bhīmasainikaḥ|| 30

अर्थ

यह प्रज्वार नामका मेरा भाई है और तू मेरी बहिन बन जा। तुम दोनोंके साथ मैं अव्यक्त गतिसे भयंकर सेना लेकर सारे लोकोंमें विचरूँगा’॥ ३०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां चतुर्थस्कन्धे पुरंजनोपाख्याने सप्तविंशोऽध्यायः॥ २७॥

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