श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.10

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

तेषु तद्रिक्थहारेषु गृहकोशानुजीविषु।

निरूढेन ममत्वेन विषयेष्वन्वबध्यत॥ १०

teṣu tadrikthahāreṣu gṛhakośānujīviṣu|

nirūḍhena mamatvena viṣayeṣvanvabadhyata|| 10

अर्थ

इन पुत्र, पौत्र, गृह, कोश, सेवक और मन्त्री आदिमें दृढ़ ममता हो जानेसे वह इन विषयोंमें ही बँध गया॥ १०॥

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