श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.26.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

अन्यथा कर्म कुर्वाणो मानारूढो निबध्यते।

गुणप्रवाहपतितो नष्टप्रज्ञो व्रजत्यधः॥ ८

anyathā karma kurvāṇo mānārūḍho nibadhyate|

guṇapravāhapatito naṣṭaprajño vrajatyadhaḥ|| 8

अर्थ

नहीं तो, मनमाना कर्म करनेसे मनुष्य अभिमानके वशीभूत होकर कर्मोंमें बँध जाता है तथा गुण-प्रवाहरूप संसारचक्रमें पड़कर विवेक-बुद्धिके नष्ट हो जानेसे अधम योनियोंमें जन्म लेता है॥ ८॥✎ 418

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #418 शब्दोंके बीचका स्थान: (बंब),दो → (बंब), दो

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