प्राचीनबर्हि! तब उसने चित्तमें कुछ उदास होकर अन्तःपुरकी स्त्रियोंसे पूछा, ‘सुन्दरियो! अपनी स्वामिनीके सहित तुम सब पहलेकी ही तरह कुशलसे हो न?॥ १४॥
अन्तःपुरस्त्रियोऽपृच्छद्विमना इव वेदिषत्।
अपि वः कुशलं रामाः सेश्वरीणां यथा पुरा॥ १४
प्राचीनबर्हि! तब उसने चित्तमें कुछ उदास होकर अन्तःपुरकी स्त्रियोंसे पूछा, ‘सुन्दरियो! अपनी स्वामिनीके सहित तुम सब पहलेकी ही तरह कुशलसे हो न?॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.26.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 541) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/26/14/