‘कमलदललोचने’! मुझे बताओ तुम कौन हो, किसकी कन्या हो? साध्वी! इस समय आ कहाँसे रही हो, भीरु! इस पुरीके समीप तुम क्या करना चाहती हो?॥ २६॥
का त्वं कञ्जपलाशाक्षि कस्यासीह कुतः सति।
इमामुपपुरीं भीरु किं चिकीर्षसि शंस मे॥ २६
‘कमलदललोचने’! मुझे बताओ तुम कौन हो, किसकी कन्या हो? साध्वी! इस समय आ कहाँसे रही हो, भीरु! इस पुरीके समीप तुम क्या करना चाहती हो?॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 536) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/26/