एक दिन उसने हिमालयके दक्षिण तटवर्ती शिखरोंपर कर्मभूमि भारतखण्डमें एक नौ द्वारोंका नगर देखा। वह सब प्रकारके सुलक्षणोंसे सम्पन्न था॥ १३॥
स एकदा हिमवतो दक्षिणेष्वथ सानुषु।
ददर्श नवभिर्द्वार्भिः पुरं लक्षितलक्षणाम्॥ १३
एक दिन उसने हिमालयके दक्षिण तटवर्ती शिखरोंपर कर्मभूमि भारतखण्डमें एक नौ द्वारोंका नगर देखा। वह सब प्रकारके सुलक्षणोंसे सम्पन्न था॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 534) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/13/