अब भी जो भगवत्परायण पुरुष इसका एकाग्र चित्तसे नित्यप्रति जप करेगा, उसका शीघ्र ही कल्याण हो जायगा॥ ७४॥
अथेदं नित्यदा युक्तो जपन्नवहितः पुमान्।
अचिराच्छ्रेय आप्नोति वासुदेवपरायणः॥ ७४
अब भी जो भगवत्परायण पुरुष इसका एकाग्र चित्तसे नित्यप्रति जप करेगा, उसका शीघ्र ही कल्याण हो जायगा॥ ७४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.74 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 532) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/74/