श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.68

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अथ त्वमसि नो ब्रह्मन् परमात्मन् विपश्चिताम्।

विश्‍वं रुद्रभयध्वस्तमकुतश्चिद्भया गतिः॥ ६८

atha tvamasi no brahman paramātman vipaścitām|

viśvaṃ rudrabhayadhvastamakutaścidbhayā gatiḥ|| 68

अर्थ

ब्रह्मन्! इस प्रकार सारा जगत् रुद्ररूप कालके भयसे व्याकुल है। अतः परमात्मन्! इस तत्त्वको जाननेवाले हमलोगोंके तो इस समय आप ही सर्वथा भयशून्य आश्रय हैं॥ ६८॥✎ 1974

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