श्यामवर्ण कटिभागमें पीताम्बर और सुवर्णकी मेखला शोभायमान है। समान और सुन्दर चरण, पिंडली, जाँघ और घुटनोंके कारण आपका दिव्य विग्रह बड़ा ही सुघड़ जान पड़ता है॥ ५१॥
श्यामश्रोण्यधिरोचिष्णुदुकूलस्वर्णमेखलम्।
समचार्वङ्घ्रिजङ्घोरुनिम्नजानुसुदर्शनम् ॥ ५१
श्यामवर्ण कटिभागमें पीताम्बर और सुवर्णकी मेखला शोभायमान है। समान और सुन्दर चरण, पिंडली, जाँघ और घुटनोंके कारण आपका दिव्य विग्रह बड़ा ही सुघड़ जान पड़ता है॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 529) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/51/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1940 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): रोचिष्णुर्दुकूल → रोचिष्णुदुकूल