॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.24.36
नमो नमोऽनिरुद्धाय हृषीकेशेन्द्रियात्मने।
नमः परमहंसाय पूर्णाय निभृतात्मने॥ ३६✎ 925
namo namo'niruddhāya hṛṣīkeśendriyātmane|
namaḥ paramahaṃsāya pūrṇāya nibhṛtātmane|| 36
अर्थ
आप ही इन्द्रियोंके स्वामी, मनस्तत्त्वके अधिष्ठाता भगवान् अनिरुद्ध हैं; आपको बार-बार नमस्कार है। आप अपने तेजसे जगत्को व्याप्त करनेवाले सूर्यदेव हैं, पूर्ण होनेके कारण आपमें वृद्धि और क्षय नहीं होता; आपको नमस्कार है॥ ३६॥