॥ श्रीहरिः ॥
इत्यनुक्रोशहृदयो भगवानाह तान् शिवः।
बद्धाञ्जलीन् राजपुत्रान्नारायणपरो वचः॥ ३२
ityanukrośahṛdayo bhagavānāha tān śivaḥ|
baddhāñjalīn rājaputrānnārāyaṇaparo vacaḥ|| 32
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—तब नारायणपरायण करुणार्द्रहृदय भगवान् शिवने अपने सामने हाथ जोड़े खड़े हुए उन राजपुत्रोंको यह स्तोत्र सुनाया॥ ३२॥
इत्यनुक्रोशहृदयो भगवानाह तान् शिवः।
बद्धाञ्जलीन् राजपुत्रान्नारायणपरो वचः॥ ३२
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—तब नारायणपरायण करुणार्द्रहृदय भगवान् शिवने अपने सामने हाथ जोड़े खड़े हुए उन राजपुत्रोंको यह स्तोत्र सुनाया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 527) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/24/32/