na madbhāgavatānāṃ ca preyānanyo'sti karhicit|| 30
अर्थ
तुमलोग भगवद्भक्त होनेके नाते मुझे भगवान्के समान ही प्यारे हो। इसी प्रकार भगवान्के भक्तोंको भी मुझसे बढ़कर और कोई कभी प्रिय नहीं होता॥ ३०॥
अथ भागवता यूयं प्रियाः स्थ भगवान् यथा।
न मद्भागवतानां च प्रेयानन्योऽस्ति कर्हिचित्॥ ३०
तुमलोग भगवद्भक्त होनेके नाते मुझे भगवान्के समान ही प्यारे हो। इसी प्रकार भगवान्के भक्तोंको भी मुझसे बढ़कर और कोई कभी प्रिय नहीं होता॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 527) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/30/